मौलिक रूपांतरकारी नेतृत्व (रैडिकल ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप),मुंबई 2026
द्विभाषी कार्यक्रम (हिंदी और मराठी में)
सत्र I: 4–6 सितंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र II: 2–4 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र III: 27–29 नवंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)

निमंत्रण
Invitation
प्रिय सहकर्मी,
हमें आशा है कि आप और आपका परिवार स्वस्थ होंगे।
हर कोई मौलिक रूपांतरणकारी लीडर बनने का चुनाव कर सकता है और हमारे समाज, घर या कार्यस्थल में मौजूद चुनौतियों का समाधान करने में योगदान दे सकता है। आज की चुनौतियाँ ऐसे नए रूपांतरणों की मांग करती हैं, जो हमारी आंतरिक क्षमताओं से प्रेरित हों और बदलाव लाने के लिए नए दृष्टिकोण और डिज़ाइन प्रस्तुत करें। मौलिक शब्द का अर्थ है "जड़" ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी मौलिक (Radical) को "किसी चीज़ की मूल प्रकृति से संबंधित या प्रभावित करने वाली" के रूप में परिभाषित करती है। हमारा 'मौलिक' से अर्थ है - अपनी आंतरिक क्षमता में होने का मूल, अपना स्वभाव, जो प्रकट होता है जब हम अपने अहंकार को पीछे छोड़ देते हैं। इसका तात्पर्य है कि हम अव्यावहारिक सांस्कृतिक मानदंडों और असाध्य प्रणालियों में बदलाव लाकर विशेष नतीजे उत्पन्न कर सकते हैं।
मौलिक रूपांतरणकारी नेतृत्व क्षमताएँ - सैद्धांतिक क्रिया, कार्यनीतिक डिज़ाइन, रचनात्मक सोच, सृजनात्मक वार्तालाप और नतीजे - एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए आवश्यक हैं जो गरिमा, न्यायसंगतता और करुणा के मूल्यों पर आधारित हो। ये नई क्षमताएँ व्यक्तियों और संगठनों में सिद्धांत, उद्देश्य और अभ्यास के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं, जो हमारी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।
आरटीएल वर्क्स,व्यक्तियों और संगठनों का एक समूह है, जो सबके लिए कल्याण सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है, और यह आज के समय में बेहद प्रासंगिक है।
इस कार्यशाला श्रृंखला के माध्यम से आपको ऐसे टेम्प्लेट्स और टूल्स प्राप्त होंगे, जो आपके कार्य और परियोजनाओं का नेतृत्व करने में मदद करेंगे, जिससे आपकी पहुंच और सार्वभौमिक-प्रभाव दुनिया में बढ़ सके। यह कार्यशाला मीडिया, सरकार, नागरिक समाज, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के स्थापित या नए उभरते लीडर को अवसर देती है कि वे अपने कार्य, संगठन और पहल को सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण की दिशा में स्थानांतरित करने के लिए बदलाव लाने वाले मुद्दों का अन्वेषण करें।
डॉ. मोनिका शर्मा, पुरस्कार विजेता पुस्तक ‘रैडिकल ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप: स्ट्रैटेजिक एक्शन फॉर चेंज एजेंट्स’ की लेखिका हैं। यह पुस्तक एक अनूठे प्रतिक्रिया मॉडल पर आधारित है – एक जागरूक पूर्ण-स्पेक्ट्रम प्रतिक्रिया मॉडल – जो एक साथ समस्याओं का समाधान करता है, प्रणालियों में बदलाव लाता है और सार्वभौमिक मूल्यों से प्रेरित नए पैटर्न बनाता है। यह पुस्तक 2017 नॉटिलस गोल्ड बुक अवॉर्ड की विजेता है, जो व्यापार और नेतृत्व के लिए प्रदान किया जाता है। पूर्व विजेताओं में डेसमंड टूटू, दलाई लामा और थिक न्हाट हान शामिल हैं।
डॉ. मोनिका शर्मा एक विश्व स्तरीय प्रैक्टिशनर कोच और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व नेतृत्व और क्षमता विकास निर्देशक हैं। उनकी क्षमता बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को नेतृत्व देने और ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए लोगों की प्रतिबद्धता को प्रेरित करने में वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती है।
यह सामाजिक परिवर्तन कार्यशाला आपकी पूर्ण क्षमता को उजागर करने और दूसरों को शामिल करने के लिए डिज़ाइन की गई है ताकि हम अपने जीवन, कार्य और समाज में परिवर्तन लाकर संपूर्ण प्रणाली परिवर्तन और एकीकृत डिज़ाइन सिद्धांतों का उपयोग करके परिणाम उत्पन्न कर सकें।
यह वर्कशॉप हिंदी और मराठी में आयोजित की जाएगी, ताकि परिवर्तनकारी नेतृत्व के टूल्स द्विभाषी रूप में सुलभ बन सकें। लगभग 66 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं और लगभग 8.3 करोड़ लोग मराठी बोलते हैं। वर्कशॉप दोनों भाषाओं में होने से प्रतिभागी उस भाषा में सीख सकते हैं, जिसमें वे सबसे अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं और गहराई से भाग ले सकते हैं। अपनी मातृभाषा में सीखना न केवल समझ को आसान बनाता है, बल्कि दैनिक जीवन और कार्य में अर्थपूर्ण विचार और टूल्स के व्यावहारिक उपयोग को भी प्रोत्साहित करता है।
कार्यशाला उन सभी बदलाव लाने वालों के लिए खुली है जो समता और टिकाऊ परिणाम उत्पन्न करने के लिए इच्छुक हैं। कार्यशाला का संचालन करेंगे चित्रा लक्ष्मण, ग्लासिका वर्मा, सुधा कोठारी, सुदर्शन रोड्रिग्स, श्रीलता जुव्वा, और युगंधरा काजरे।
तिथियां
सत्र I: 4–6 सितंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र II: 2–4 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र III: 27–29 नवंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
समय: सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक (भारतीय मानक समय)
सिवाय पहले सत्र के पहले दिन: सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक।
स्थान :
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) वी. एन. पुराव मार्ग, देवनार,
मुंबई – 400088,महाराष्ट्र, भारत
कार्यक्रम हम सभी को अपने भीतर गहराई तक जाने के लिए प्रेरित करेगा ; और नए, प्रभावी विचार उत्पन्न करेगा, जिससे हम एक नए भविष्य की कल्पना कर सकते हैं, इसे प्राप्त करने के लिए कार्य कर सकते हैं और इसकी प्राप्ति के लिए कौशल अर्जित कर सकते हैं। इस कार्यशाला में 3 सत्र होंगे, जो 9 दिनों तक चलेंगे और एक-एक महीने के अंतराल पर आयोजित होंगे। प्रत्येक सत्र में नई क्षमताओं को पेश किया जाएगा और इनका अभ्यास सत्र के बीच किया जाएगा ताकि इन्हें क्रियान्वित किया जा सके।
कृपया ध्यान दें: सभी प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यक्रम के सभी दिनों और तीनों सत्रों में पूरी तरह भाग लेने का प्रतिबद्ध होना आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक सत्र पिछले सत्र और उसके सीखने पर आधारित होता है। यह कार्यक्रम 3 सत्रों की एक श्रृंखला से बना है।
आवेदन करने के लिए
पंजीकरण शुल्क
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शुल्क - शीघ्र घोषित किया जाएगा।
नोट:
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कार्यशाला शुल्क में अध्ययन/संसाधन सामग्री, भोजन (नाश्ता,दोपहर का भोजन, दिन में दो बार चाय और बिस्कुट) और स्थल शुल्क का योगदान शामिल है।
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इस कार्यशाला में प्रतिभागियों के यात्रा, आवास (Stay) और रात्रि भोजन की लागत शामिल नहीं है।
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यह एक प्रायोजित कार्यक्रम नहीं है, और हमें कार्यशाला के लिए कोई अनुदान/धन प्राप्त नहीं हुआ है।
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किसी भी सहायता के लिए कृपया ग्लासिका वर्मा (6260337629) या team@rtlworks.com पर हमसे संपर्क करने में संकोच न करें।
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यदि आप किसी उम्मीदवार को प्रायोजित करना चाहते हैं या छात्रवृत्ति में योगदान देना चाहते हैं, तो कृपया ग्लासिका वर्मा (6260337629) या team@rtlworks.com पर संपर्क करें।
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RTL टीम (सिग्नल/व्हाट्सएप): +91 9869219901
महत्वपूर्ण तिथियां याद रखने के लिए:
● 15 अगस्त 2026 : पंजीकरण की अंतिम तिथि
● 20 अगस्त 2026: कार्यशाला शुल्क का भुगतान करने की अंतिम तिथि
सुदर्शन रोड्रिग्स
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)
कांसेप्ट नोट
मौलिक रूपांतरकारी नेतृत्व (रैडिकल ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप),मुंबई 2026
द्विभाषी कार्यक्रम (हिंदी और मराठी में)
सत्र I: 4–6 सितंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र II: 2–4 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
सत्र III: 27–29 नवंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
यह सामाजिक रूपांतरण कार्यक्रम नैतिक नेतृत्व और सम्पूर्ण मानवीय क्षमता को विकसित करने के लिए रूपांकित किया गया है, ताकि लोग अपने जीवन, अपने काम और अपने समुदायों को ऐसे ढंग से रूपांतरित कर सकें जो शांति, साझा समृद्धि और एक समृद्ध धरती को जन्म दे। समग्र प्रणालीगत नजरिये और व्यावहारिक टूल्स के सहारे, प्रतिभागी उन परियोजनाओं को गढ़ने और उनका नेतृत्व करने की अपनी क्षमता को सुदृढ़ करते हैं जो असमानता, आजीविका, शिक्षा और सामाजिक समावेशन जैसी वास्तविक चुनौतियों को संबोधित करती हैं। यह कार्यक्रम ज़मीनी स्तर, सामाजिक क्षेत्र और मिशन-चालित संगठनों से आए लीडर्स को एक साथ लाता है, ताकि कार्य-आधारित साझेदारियाँ बन सकें और लोगों व धरती के लिए अर्थपूर्ण और टिकाऊ बदलाव साकार हो सके।
पृष्ठभूमि
RTLWorks एक ऐसी पोषणकारी समाज रचने के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ हर व्यक्ति गरिमा, कल्याणकारी और उद्देश्य के साथ जीवन जी सके, और जहाँ हमारे समुदाय और हमारी धरती साथ-साथ फल-फूल सकें।
हर कोई मौलिक रूपांतरणकारी नेतृत्वकर्ता बनना चुन सकता है और समाज, घर या कार्यस्थल में मौजूद चुनौतियों को संबोधित करने में अपना योगदान दे सकता है। इसके लिए ऐसे नए रूपांतरणों की आवश्यकता है जो हमारी आंतरिक क्षमताओं से स्रोतित हों, और ऐसा नया डिज़ाइन जो वास्तविक फर्क पैदा कर सके। इसका अर्थ है कि हम अव्यवहारी सांस्कृतिक मानकों और प्रणालियों को रूपांतरित कर असाधारण नतीजे उत्पन्न कर सकते हैं।
आज हम कई परस्पर जुड़ी हुई संकटों का सामना कर रहे हैं — बढ़ता संघर्ष और ध्रुवीकरण, स्वास्थ्य और आजीविका पर मंडराते खतरे, पर्यावरणीय क्षरण, और युवाओं के भीतर बढ़ती व्याकुलता। भले ही हम जानते हों कि अन्याय और गरीबी को कैसे संबोधित किया जाए, पर्यावरणीय संकट पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए, और हमारे पास संसाधन भी हों; फिर भी अक्सर हम न तो अपने स्व-कल्याण के लिए काम करते हैं और न ही उन निर्णायक मुद्दों पर जो एक समृद्ध समुदाय और धरती रच सकें। हमारे कार्यों और हमारे सबसे गहरे मूल्यों के बीच संरेखण की कमी रहती है, जिससे अधूरे और बिखरे हुए प्रत्युत्तर जन्म लेते हैं। इन गहरे मूल्यों — जैसे करुणा और गरिमा — के साथ संरेखण आवश्यक है। ये ही वे सार्वभौमिक मूल्य हैं जो हर जगह, हर किसी पर लागू होते हैं — केवल अपने निकट के लोगों तक सीमित नहीं।
दुनिया भर के लोगों में एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी भविष्य रचने की अपार क्षमता है। इसके लिए हमें नई संभावनाओं को पहचानना, अल्पकालिक और दीर्घकालिक सोच को एकीकृत करना, और ज्ञान व तकनीक को इस तरह साधना होगा कि नए पैटर्न और प्रणालियाँ जन्म लें — जहाँ हम मूल्यों को आत्मरूपित करें, हर व्यक्ति का सम्मान करें और विविधता को अपनाएँ। यह एक ऐसी सांस्कृतिक रूपांतरण की पुकार है जो बड़े पैमाने पर और टिकाऊ हो — सृजनात्मक संवादों और कार्यों के माध्यम से — जो सभी के कुशलता और समतामूलक विकास को सशक्त बनाए।
हमें कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों का सामना करना पड़ता है और उन्हें पूछना आवश्यक है:
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हमारे शहरों में घर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाने वाले प्रवासी कामगारों को स्वास्थ्य और कल्याण के संदर्भ में सबसे कम ध्यान क्यों मिलता है?
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कुछ बच्चे भूखे पेट सोने को क्यों मजबूर हैं, जबकि इतना सारा भोजन व्यर्थ किया जा रहा है?
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हमारा देश — और पूरी दुनिया — आज भी इतने अधिक अन्याय, सामाजिक बहिष्करण, असमानताओं और विषमताओं से क्यों जूझ रही है?
खंडित दृष्टिकोण और अल्पकालिक सोच आज की जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। आवश्यकता है ऐसे नए ढंग से डिज़ाइन करने की, जो मूल्यों को व्यवहारिक कर्म से संरेखित करे और टिकाऊ व समतामूलक समाधान रच सके। शिक्षकों, सामाजिक क्षेत्र के नेतृत्वकर्ताओं और समुदाय में बदलाव लाने वालों के बीच ऐसे नेतृत्व को सुदृढ़ करना एक ऐसी पीढ़ी को पोषित कर सकता है जो शांतिपूर्ण, लचीले और समृद्ध समुदायों का निर्माण करने में सक्षम हो।
कार्यक्रम का उद्देश्य
लीडरों और संगठनों को बढ़ावा देना जो अपनी पूरी क्षमता से नैतिक नेतृत्व के लिए स्रोत बनते हैं और सार्वभौमिक मूल्यों के आधार पर समस्याओं के समाधान के लिए प्रणालियों और सांस्कृतिक मानदंडों में बदलाव करके मानव और पर्यावरणीय कल्याण के लिए एक से ज्यादा सैद्धांतिक नज़रिया रखते हैं।
लक्ष्य
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कार्यनीतिक और नैतिक कार्यों के लिए अपनी रचनात्मकता और सम्पूर्ण क्षमता को स्रोतित करना।
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यह खोजना कि लोग अपने उद्देश्य को कैसे साकार कर सकते हैं और बदलाव ला सकते हैं, साथ ही काम न करने वाली प्रणालियों को परिवर्तित करना।
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प्रेरित करना कि प्रणालियों में पैटर्न कैसे देखे जाएँ ताकि समस्याओं को न्यायसंगत और प्रभावी ढंग से सुलझाया जा सके।
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चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए व्यवहारिक योजनाएँ विकसित करना, विशेषकर संकट के समय।
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कार्यों को नतीजों के साथ संरेखित करना ताकि स्थायी और न्यायपूर्ण बदलाव हो और विचारों को बड़े प्रभाव के लिए बढ़ाया जा सके।
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परियोजनाओं के प्रबंधन से अर्थपूर्ण बदलाव के नेतृत्व की ओर बढ़ना, और साझेदारियाँ बनाना जो आपके काम को सुदृढ़ करें।
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समावेशन और विकास को सीमित करने वाली प्रथाओं या बाधाओं को पहचानना और रोकना।
कार्यक्रम के बारे मे
RTL एक नवाचारी नेतृत्व कार्यक्रम है, जिसे पूरी दुनिया में पैटर्न बदलने वाले रूपांतरण उत्पन्न करने के लिए सिद्ध किया गया है। यह एक विशिष्ट समग्र प्रणालीगत रूपांतरण-केन्द्रित, कार्य करते हुए सीखने का कार्यक्रम है, जो हमें हमारे सार्वभौमिक आंतरिक क्षमता—हमारे गहरे मूल्य और मौजूदा विशेषज्ञता—में स्थिर करता है, हमें विभिन्न नजरियों को अपनाने में सक्षम बनाता है, और सांस्कृतिक एवं प्रणालीगत स्तर पर बदलाव डिज़ाइन करने में मार्गदर्शन करता है।
यह वर्कशॉप हिंदी और मराठी में आयोजित की जाएगी, ताकि परिवर्तनकारी नेतृत्व के टूल्स द्विभाषी रूप में सुलभ बन सकें। लगभग 66 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं और लगभग 8.3 करोड़ लोग मराठी बोलते हैं। वर्कशॉप दोनों भाषाओं में होने से प्रतिभागी उस भाषा में सीख सकते हैं, जिसमें वे सबसे अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं और गहराई से भाग ले सकते हैं। अपनी मातृभाषा में सीखना न केवल समझ को आसान बनाता है, बल्कि दैनिक जीवन और कार्य में अर्थपूर्ण विचार और टूल्स के व्यावहारिक उपयोग को भी प्रोत्साहित करता है।
मॉडल
कार्यक्रम एक अनूठे प्रतिक्रिया मॉडल - जागरूकता पूर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिक्रिया (CFSR) मॉडल - का उपयोग करेगा, जो नई पीढ़ी की सोच का एक अत्याधुनिक मॉडल है और जिसे विश्वभर में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के लिए सिद्ध किया गया है। इसे डॉ. मोनिका शर्मा (पुस्तक “Radical Transformational Leadership: Strategic Action for Change Agents” की लेखिका) द्वारा डिजाइन किया गया है। यह पुस्तक 35 वर्षों से भी अधिक समय तक लोगों के विकास के लिए विभिन्न तरीकों, ढांचे, और टूल्स के उपयोग से प्राप्त ठोस परिणामों पर आधारित है, जो 60 से अधिक देशों में लागू किया गया है।
यह मेटा-फ्रेम एक साथ समय में समस्याओं को हल करने और मापने योग्य परिणाम उत्पन्न करने, अप्रभावी प्रणालियों और सांस्कृतिक मानदंडों को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो इन समस्याओं को बनाए रखते हैं, और व्यक्तियों की आंतरिक क्षमता, सार्वभौमिक मूल्यों और परिवर्तनकारी नेतृत्व से प्राप्त नए पैटर्न बनाते हैं। यह ‘विकास’ की पुनर्परिभाषा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें हमारे आंतरिक और बाहरी संसार, दोनों को व्यक्तियों और समूहों के रूप में शामिल किया गया है, ताकि हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनसे निपटने के लिए मानवीय और सांस्कृतिक क्षमताओं की व्यापक पहुँच का स्रोत बन सकें।
यह प्रतिमान बदलाव के तीन धागों को आपस में जोड़ता है: (a) कार्य के लिए हमारी आत्मज्ञान /आंतरिक क्षमता और सार्वभौमिक मूल्यों का स्रोत बनाना; (b) सांस्कृतिक मानदंडों, प्रणालियों और संरचनाओं को बदलना जो यथास्थिति को बनाए रखते हैं और सैद्धांतिक रूपांतकारी लीडर बन जाते हैं; और (c) समस्याओं को हल करना ताकि विशिष्ट समता और टिकाऊ परिणाम उत्पन्न हो सकें।
जागरूकता पूर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिक्रिया मॉडल परिवर्तन के लिए एक आधारभूत विकास मॉडल है। यह एक अंतःविषय मॉडल और कार्यनीति कार्य के लिए ढांचा है और यह विभिन्न क्षेत्रों, विभिन्न विचारधाराओं के ढांचों को समेटने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है। जागरूक पूर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिक्रिया मॉडल किसी भी क्षेत्र में लागू किया जा सकता है क्योंकि यह विषय-निर्पेक्ष है और यह बहु- नजरियों को एक साथ रखते हुए भी सैद्धांतिक कार्य और परिणाम उत्पन्न करने की क्षमता को प्रोत्साहित करता है। यह नई सोच और कार्य करने का तरीका आज के लीडर - सामाजिक और पर्यावरणीय अभ्यासकों, शिक्षकों, मीडिया और कानूनी पेशेवरों, कार्यकर्ताओं और परोपकारी व्यक्तियों, उद्यमियों और सरकारी प्रतिनिधियों/स्टाफ के लिए सिद्धांतों, उद्देश्य और अभ्यास के गहन संगम का अनुभव करने का एक नया मार्ग प्रदान करता है, जो पूरे मानवता के लिए ठोस परिणाम उत्पन्न करते हैं।
कार्यक्रम पारंपरिक सीमाओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें वर्तमान और उभरती परिवर्तन प्रक्रियाओं के सभी प्रासंगिक आयामों को समेटने वाले व्यापक दृष्टिकोणों का एक सेट प्रस्तुत किया गया है। यह नागरिकों और परिवर्तन के संरक्षकों/नेताओं को अपने स्वयं के परिवर्तनकारी प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता रखता है। डिज़ाइन प्रतिभागियों से यह अपेक्षा करता है कि वे अपने प्रोजेक्ट्स को बनाएं जिन्हें वे महत्वपूर्ण मानते हैं और जिन्हें वे बदलना चाहते हैं, और बड़े पैमाने पर कार्य और नवाचार का अन्वेषण करें।
"हमने अब तक जिस स्तर की सोच के परिणामस्वरूप दुनिया बनाई है,वह ऐसी समस्याएं पैदा करती है जिन्हें हम उसी स्तर पर हल नहीं कर सकते हैं जिस पर हमने उन्हें बनाया है ...यदि मानव जाति को जीवित रहना है तो हमें वास्तव में एक नए तरीके की सोच की आवश्यकता है।”- अल्बर्ट आइंस्टीन
"गरीबी कोई दुर्घटना नहीं है। गुलामी और रंगभेद की तरह, यह भी मानव निर्मित है और इसे मानव के कार्यों द्वारा हटाया जा सकता है।" - नेल्सन मंडेला
कौन भाग ले सकता है?
कोई भी व्यक्ति और संगठन जो समानता, मानव एकता और सभी के लिए गरिमा की दिशा में कार्यरत है या समाज में सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण के लिए बदलाव लाने की इच्छा रखता है; शिक्षा/अकादमिक, कॉर्पोरेट, सरकार, नागरिक समाज, और संचार एवं मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत संगठन और व्यक्ति भाग ले सकते हैं। किसी संगठन या टीम से एक से अधिक प्रतिभागियों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रतिभागियों के विचार
"मेरे लिए आरटीएल कार्यक्रम में भाग लेना मुझे एक मजबूत व्यक्ति बनने में मदद मिली है और मुझे यह साहस दिया है कि मैं न्याय और निष्पक्षता के लिए अपनी स्थिति और सिद्धांतों से बोल सकूं, परिणामों और अपने भय की चिंता किए बिना ।आरटीएल कार्यक्रम में उपयोग किए गए विभिन्न टूल्स ने मुझे अपने सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य परियोजना को पुनः डिज़ाइन करने में सक्षम बनाया है, जो अब अधिक समावेशी, टिकाऊ और बहु-हितधारकों को संलग्न करने वाला है।”
“RTL ने मुझे उस स्थान पर पहुंचाया जहां मैं खुद को खोज सकता हूं, घर, कार्यस्थल और समाज में रोजमर्रा के कार्यों में जान ला सकता है। मैं खुद को रोजमर्रा के कार्यों में एक जुड़े हुए अस्तित्व के रूप में देखता हूं। CFSR मॉडल और सभी टूल्स ने मुझे इस बात पर स्थिर रहने में मदद की है कि मुझे जिसकी परवाह है, जटिलताओं का सामना करने के लिए बड़ी तस्वीर देखना और वास्तविकता में कार्य करना।”
“आरटीएल कार्यक्रम ने मुझे उस ज़िम्मेदारी के प्रति जागृत किया कि मुझे दुनिया में परिवर्तन के एक एजेंट के रूप में अपनी पूरी क्षमता से उस चीज़ से जुड़ना है जिसकी मैं वास्तव में परवाह करता हूँ। इसने मुझे आज की दुनिया में स्पष्ट असमानता और ध्रुवीकरण का सामना करने, सभी के लिए समानता की बात करने वाले सार्वभौमिक मूल्यों में खड़े होने का साहस दिया। कार्यक्रम ने मुझे अलग तरीके से डिज़ाइन करना सिखाया, हमेशा सार्वभौमिक मूल्यों को मुख्य तत्व के रूप में रखते हुए, जबकि उन मानदंडों और प्रणालियों को चुनौती देते हुए जो समस्याएं उत्पन्न करते हैं और उन्हें बनाए रखते हैं, और मूल्यों-आधारित समाधानों को डिजाइन और कार्यान्वित करते हैं जो किसी को भी बाहर नहीं छोड़ते हैं। मुझे लगता है कि मैं विकास और सतत् सीखने के एक मार्ग पर चल रहा हूं जो जीवनभर चलेगा।”
"मैं अपने और दूसरों के लिए समानता और समता के लिए खड़ा हूं। आरटीएल कार्यक्रम मुझे लगातार यह सोचने में मदद करता है कि मैंने क्या किया है और मैं क्या करने जा रहा हूं, ईमानदारी के दृष्टिकोण का उपयोग करके और विनाशकारी क्रोध को साहसी हृदय प्रतिक्रिया में परिवर्तित करके। यह मुझे खुद से सवाल करने और समस्याओं को अवसरों के रूप में देखने की आवश्यकता महसूस कराता है। मैं टूल्सऔर टेम्प्लेट्स का उपयोग करता हूं ताकि मैं अपने आप को संरेखित कर सकूं, अपने आप को स्थिर कर सकूं और एक मानव के रूप में संपूर्ण महसूस कर सकूं।”
“एक प्रक्रिया जिसने मुझे यह देखने में मदद की है कि मैं परिवर्तन का एक एजेंट हूं, यह एक उत्प्रेरक था जिसने मुझे उस परिवर्तन का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जिसे मैं देखना चाहता हूं, इसने मेरे सपनों को विस्तारित और संरचित किया है और मुझे इन सपनों को सभी के लिए एक बेहतर जीवन के लिए प्रकट करने के लिए स्थान और टूल्स दिए हैं। यह एक सतत गहरा और रोजमर्रा का अभ्यास है।”
कार्यक्रम की तिथियाँ
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सत्र I: 4–6 सितंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
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सत्र II: 2–4 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
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सत्र III: 27–29 नवंबर 2026 (शुक्रवार–रविवार)
समय: सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक (भारतीय मानक समय)
सिवाय पहले सत्र के पहले दिन: सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक।
स्थान:टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) वी. एन. पुराव मार्ग, देवनार,
मुंबई – 400088,महाराष्ट्र, भारत
कृपया ध्यान दें: सभी प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यक्रम के सभी दिनों और तीनों सत्रों में पूरी तरह भाग लेने का प्रतिबद्ध होना आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक सत्र पिछले सत्र और उसके सीखने पर आधारित होता है। यह कार्यक्रम 3 सत्रों की एक श्रृंखला से बना है। नए टेम्पलेट और टूल प्रतिभाओं को बढ़ाने के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं; और बीच के साप्ताहिक सत्रों में हम इन सीखों और क्षमताओं का व्यावहारिक अभ्यास करते हैं। प्रतिभागी विभिन्न क्षेत्रों के अन्य लोगों के साथ मिलकर सामान्य भाषा विकसित और अभ्यास करते हैं, ताकि हम तालमेल में काम कर सकें।
आवेदन करने के लिए
पंजीकरण शुल्क
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शुल्क - शीघ्र घोषित किया जाएगा।
नोट:
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कार्यशाला शुल्क में अध्ययन/संसाधन सामग्री, भोजन (नाश्ता, दोपहर का भोजन, दिन में दो बार चाय और बिस्कुट) और स्थल शुल्क का योगदान शामिल है।
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इस कार्यशाला में प्रतिभागियों के यात्रा, आवास (Stay) और रात्रि भोजन की लागत शामिल नहीं है।
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यह एक प्रायोजित कार्यक्रम नहीं है, और हमें कार्यशाला के लिए कोई अनुदान/धन प्राप्त नहीं हुआ है।
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किसी भी सहायता के लिए कृपया ग्लासिका वर्मा (6260337629) या team@rtlworks.com पर हमसे संपर्क करने में संकोच न करें।
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यदि आप किसी उम्मीदवार को प्रायोजित करना चाहते हैं या छात्रवृत्ति में योगदान देना चाहते हैं, तो कृपया ग्लासिका वर्मा (6260337629) या team@rtlworks.com पर संपर्क करें।
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RTL टीम (सिग्नल/व्हाट्सएप): +91 9869219901
RTL टीम (सिग्नल/व्हाट्सएप): +91 9869219901
महत्वपूर्ण तिथियाँ याद रखने के लिए
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15 अगस्त 2026: पंजीकरण की अंतिम तिथि
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20 अगस्त 2026: कार्यशाला शुल्क का भुगतान करने की अंतिम तिथि
लेखिका और संस्थापिका,मौलिक रूपांतरकारी नेतृत्व
डॉ. मोनिका शर्मा, जिन्होंने एक चिकित्सक और महामारी विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया है और 1988 से 22 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के लिए कार्य किया। वर्तमान में, वह सतत और न्यायपूर्ण परिवर्तन के लिए नेतृत्व विकास पर एक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रैक्टिशनर के रूप में विश्वभर में कार्य करती हैं। वह संयुक्त राष्ट्र, विश्वविद्यालयों, प्रबंधन संस्थानों, सरकारों, व्यवसायों, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों के साथ काम करती हैं।
वह पुरस्कार विजेता पुस्तक "Radical Transformational Leadership: Strategic Action for Change Agents" की लेखिका हैं। उन्होंने एक अद्वितीय प्रतिक्रिया मॉडल – एक जागरूक पूर्ण-स्पेक्ट्रम प्रतिक्रिया मॉडल – तैयार किया, जो कई सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित समतामूलक और सतत परिणाम उत्पन्न करने के लिए व्यापक रूप से लागू किया गया।
एक प्रैक्टिशनर के रूप में, उनकी मापने योग्य परिणामों को बड़े पैमाने पर उत्पन्न करने की सिद्ध उपलब्धियां, सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की विशेषज्ञता, और प्रत्येक महाद्वीप पर नेतृत्व को बढ़ाने की उनकी योग्यता अद्वितीय हैं।
बायोसकेचेस ऑफ द रिसोर्स पर्सन्स:
ग्लासिका वर्मा एक सामाजिक कार्य परामर्शदाता हैं और RTL-Works ग्लासिका की सहायक समन्वयक हैं। वे मानवता, खुशी और आनंद की गहरी परवाह करती हैं। वर्तमान में, वे RTLWorks में कार्यक्रम समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। वे RTL ग्लोबल मानसिक स्वास्थ्य समूह की सदस्य भी हैं। उन्होंने पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, गुवाहाटी से पेशेवर सामाजिक कार्य परामर्शदाता प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे एक RTL प्रैक्टिशनर कोच हैं और RTL उपकरणों और टेम्पलेट्स का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित हैं, जिनका वे स्कूल में कल्याण को बढ़ावा देने के लिए अपने काम में उपयोग करती हैं। वे स्कूल के बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक शिक्षा (SEL) के क्षेत्र में भी काम करती हैं। वे हाशिए पर रहने वाले समुदायों के साथ मिलकर कल्याण और सहानुभूति को बढ़ावा देने का कार्य करती हैं।
चित्रा आर. लक्ष्मण एक पेशेवर रूप से योग्य सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो पिछले पच्चीस वर्षों से मुंबई के एक शहरी झुग्गी में विकलांगता प्रबंधन और सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उनका काम विकलांगता वाले छात्रों को उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं में समर्थन प्रदान करना शामिल है। उनका दृष्टिकोण सामुदायिक आधारित पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया में परिवार को शामिल करना है।
मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में उनका काम भेदभाव और मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के बहिष्करण के कलंक को तोड़ने के उद्देश्य से है। यह सामुदायिक क्लिनिक चलाकर और मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व पर समुदाय को जागरूक करके किया जा रहा है।
पिछले नौ वर्षों से RTL प्रैक्टिशनर होने के नाते, वह कहती हैं, "इसने मुझे अपने जीवन में उद्देश्य खोजने में मदद की है मेरे संवाद और क्रियाओं के माध्यम से। जब मैं आज कोई क्रिया करती हूँ, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, यह गरिमा, समानता और करुणा पर आधारित होती है। मैं अपने रोज़मर्रा के कार्यों के प्रति अधिक सचेत हो गई हूँ" और मुझे घर, काम और समाज में परिणामों को उजागर होते हुए देखने को मिल रहा है।
सुधा कोठारी एक समर्पित सामाजिक विकास अभ्यासक और रूपांतरणकारी नेतृत्वकर्ता हैं, जो अपने और दूसरों के प्रति करुणा व सहानुभूति में निहित पूर्ण मानवीय सामर्थ्य के साकार होने के लिए खड़ी हैं। अकादमिक क्षेत्र में एक संक्षिप्त अवधि बिताने के बाद उन्होंने अपना जीवन जमीनी स्तर के कार्य को समर्पित कर दिया। 1993 में उन्होंने चैतन्य की स्थापना की। महाराष्ट्र में स्व-सहायता समूह (SHG) आंदोलन में चैतन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है—यह आत्मनिर्भर SHG महासंघों को सशक्त करता है तथा छत्तीसगढ़ में सरकार के साथ मिलकर जेंडर संसाधन केंद्रों की क्षमता-वृद्धि का कार्य करता है।
पिछले पाँच वर्षों में Radical Transformational Leadership (RTL) के साथ उनकी गहरी सहभागिता ने उनके भीतर और उनके कार्यक्रमों में अर्थपूर्ण रूपांतरण लाए हैं, विशेषकर एकल महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर। वे RTL के टूल्स और डिज़ाइन टेम्पलेट्स का सक्रिय अभ्यास करती हैं, ताकि उनके प्रोजेक्ट्स में सामंजस्य, गहराई और रूपांतरणकारी प्रभाव आ सके। वे अन्य गैर-लाभकारी संगठनों और क्षेत्रीय नेतृत्व के गवर्नेंस में भी सक्रिय योगदान देती हैं।
सुदर्शन रोड्रिग्ज RTLWorks के सीईओ हैं और पर्यावरण विज्ञान, आपदा प्रबंधन और आजीविका में व्यापक विशेषज्ञता रखते हैं। वह एक प्रैक्टिशनर कोच हैं, जिन्हें कॉन्शियस फुल-स्पेक्ट्रम रिस्पांस मॉडल में प्रशिक्षण प्राप्त है, जो डॉ. मोनिका शर्मा द्वारा विकसित और बनाए गए सार्वभौमिक मूल्यों और नैतिकता पर आधारित एक ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप दृष्टिकोण है। उनकी ग्रह और मानव कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा और दुनिया भर में लोगों के विकास के लिए दृष्टिकोण उन्हें अन्य लोगों से अलग बनाता है।
श्रीलता जुव्वा एक सामाजिक कार्य शिक्षा विशेषज्ञ और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस, मुंबई में प्रोफेसर हैं। वह एक प्रैक्टिशनर कोच हैं, जिन्होंने डॉ. मोनिका शर्मा की रैडिकल ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप में प्रशिक्षण प्राप्त किया है और इसका उपयोग उच्च शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य तथा विकलांगता के सेवा वितरण को बदलने के लिए करती हैं। वह इन उपकरणों और टेम्पलेट्स का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और विकलांगता के अपमानजनक नैरेटिव को बदलने के लिए करती हैं, जिससे लोगों में गरिमा, पूर्ण क्षमता और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा मिलता हैl
युगंधरा काजरे एक सामाजिक उद्यमी हैं, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जीवन कौशल को पिछड़े समुदायों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने 2013 में 3E Training & Management Group की स्थापना की, ताकि दूरदराज़ क्षेत्रों के युवाओं तक पहुँच बनाई जा सके, और अब तक 250 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर, मजबूत ग्रासरूट अनुभव का निर्माण किया है। उन्होंने “Raise the Child” जीवन कौशल कार्यक्रम डिजाइन किया, जिसे गूहागर, रत्नागिरी की पांच स्कूलों में पायलट किया गया। 2018 से The Resilient Foundation की सह-संस्थापक के रूप में, वह स्कूल सुरक्षा, आपदा सहनशीलता, जलवायु कार्य और सामुदायिक सशक्तिकरण जैसी पहलों का नेतृत्व करती हैं, और स्कूलों व स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर स्थायी प्रभाव पैदा करती हैं।
डॉ. मोनिका शर्मा द्वारा 2019 में आयोजित Radical Transformational Leadership (RTL) वर्कशॉप में उनकी भागीदारी उनके लिए एक मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उनके कार्य को मूल्य आधारित नेतृत्व और संरचित परियोजना डिज़ाइन के साथ मजबूत किया। इसने उनके आत्म-विकास, लक्ष्य निर्धारण में स्पष्टता और प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने को और मजबूती दी। 14 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, युगंधरा अपनी कौशल, और स्थायी प्रभाव पैदा करने की प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती हैं।
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